गिर गाय भारत की सबसे प्रसिद्ध देसी दुग्ध पशु
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गिर गाय भारत की सबसे प्रसिद्ध देसी दुग्ध पशु
गिर गाय भारत की सबसे प्रसिद्ध देसी दुग्ध पशु नस्लों में से एक है, जो मुख्य रूप से गुजरात के गिर वन और उसके आसपास के क्षेत्रों में पाई जाती है। इस गाय की सबसे बड़ी पहचान इसकी घुमावदार सींग, लंबे ढले हुए कान और लाल-चिटक भूरे रंग की चमकदार त्वचा है। गिर गाय का स्वभाव शांत, मिलनसार और इंसान-दोस्त माना जाता है, इसलिए इसे संभालना भी आसान होता है। इसकी दूध देने की क्षमता लगातार और स्थिर रहती है, साथ ही इसका दूध A2 प्रोटीन से भरपूर माना जाता है। यही कारण है कि गिर गाय भारत ही नहीं, बल्कि कई विदेशी देशों में भी काफी लोकप्रिय हो चुकी है।
गिर गाय कहाँ पाई जाती है?
भारत में अनेक देसी गायों की नस्लें पाई जाती हैं, लेकिन गिर गाय अपनी उच्च दुग्ध क्षमता, मजबूत स्वास्थ्य और शांत स्वभाव के कारण विशेष रूप से प्रसिद्ध है। यह गाय न केवल राष्ट्रीय स्तर पर, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लोकप्रियता प्राप्त कर चुकी है। तो आइए जानते हैं—गिर गाय आखिर कहाँ पाई जाती है?
गिर गाय का मुख्य स्थान – गुजरात का गिर क्षेत्र
गिर गाय मुख्य रूप से गुजरात राज्य के गिर जंगल या गिर वन क्षेत्र में पाई जाती है, जिसे “गिर पर्वत श्रृंखला” भी कहा जाता है। यह क्षेत्र सौराष्ट्र के जूनागढ़, अमरेली, सोमनाथ और भावनगर जिलों में फैला हुआ है। इसी क्षेत्र के नाम पर इस गाय को गिर गाय कहा जाता है।
गिर गाय का अन्य राज्यों में फैलाव
हाल के वर्षों में गिर गाय की उच्च दूध उत्पादन क्षमता और रोग प्रतिरोधक शक्ति के कारण इसे भारत के अन्य राज्यों में भी पाला जाने लगा है। आज गिर गाय इन राज्यों में भी आसानी से मिल जाती है:
• राजस्थान
• मध्यप्रदेश
• महाराष्ट्र
• हरियाणा
• उत्तरप्रदेश
• कर्नाटक
कई किसान गिर गाय को क्रॉस-ब्रीडिंग और शुद्ध नस्ल संरक्षण दोनों ही उद्देश्यों से पालते हैं।
विदेशों में भी है गिर गाय की लोकप्रियता
गिर गाय केवल भारत तक सीमित नहीं है। यह नस्ल अब ब्राज़ील, मेक्सिको, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भी बड़े पैमाने पर पाली जाती है। ब्राज़ील में तो गिर नस्ल को सुधारकर नामक नई उच्च-दूध वाली नस्ल भी विकसित की गई है।
क्यों खास है गिर गाय?
• उत्तम दूध गुणवत्ता – A2 प्रोटीन वाला दूध
• अच्छी दूध उत्पादन क्षमता – लगभग 8–12 लीटर प्रतिदिन (कुछ में इससे भी अधिक)
• मजबूत शरीर और रोग प्रतिरोधक शक्ति
• लंबी आयु तथा आसान देखभाल
• शांत और मिलनसार स्वभाव
गिर गाय का मूल स्थान गुजरात का गिर वन क्षेत्र है, लेकिन उसकी उत्कृष्ट विशेषताओं के चलते आज यह भारत के लगभग हर राज्य में पाई जाती है और विश्व भर में भी लगातार लोकप्रिय हो रही है।
गिर गाय की पहचान – पूरी जानकारी
भारत की प्रमुख दुग्ध देने वाली देसी नस्लों में गिर गाय का नाम सबसे ऊपर आता है। यह गाय अपनी खूबसूरती, मजबूत शरीर, अधिक दूध उत्पादन और शांत स्वभाव के लिए जानी जाती है। इसकी पहचान इसके विशिष्ट शारीरिक गुणों से की जाती है। आइए विस्तार से जानते हैं कि गिर गाय कैसी दिखती है और उसकी पहचान कैसे करें।
1. माथा
गिर गाय का माथा बड़ा, चौड़ा और उभरा हुआ होता है। इसका माथा बाहर की ओर हल्का घुमाव लिए रहता है, जिससे इसका चेहरा आकर्षक दिखता है। यह उभार गिर नस्ल की खास विशेषता है।
2. आंखें
गिर गाय की आंखें बड़ी, चमकदार और हल्के भूरे या काले रंग की होती हैं। इनकी आंखों की बनावट बादाम के आकार जैसी होती है और इनकी आंखों पर एक प्राकृतिक तेज देखा जा सकता है, जो नस्ल की स्वास्थ्य स्थिति दर्शाता है।
3. कान
गिर गाय के कान लंबे, ढीले और पंखे जैसे होते हैं। ये नीचे की ओर झुके रहते हैं और अक्सर 30–40 सेमी तक लंबे हो सकते हैं। इसके कानों का आकार इसे अन्य नस्लों से अलग पहचान देता है।
4. सींग
गिर गाय के सींग आमतौर पर साइड की ओर निकलते हुए पीछे की तरफ मुड़ते हैं। इनकी लंबाई मध्यम होती है और कभी-कभी आगे की तरफ हल्का सा झुकाव भी दिखता है।
5. हम्प (कूबड़)
गिर गाय का कूबड़ बड़ा और मांसल होता है। यह गाय की शक्ति, सहनशक्ति और भारतीय जलवायु के अनुकूलन का प्रतीक है। नर में कूबड़ सामान्यतः अधिक ऊँचा व चौड़ा होता है।
6. गलकंबल
गिर गाय का गलकंबल मोटा, ढीला और लंबा होता है। गर्दन से नीचे की तरफ लटकता हुआ यह गलकंबल गर्म वातावरण में शरीर को ठंडा रखने में मदद करता है।
7. रंग
गिर गाय कई रंगों में पाई जाती है, जिनमें प्रमुख हैं –
• लाल
• चिट्टा-लाल मिश्रित
• काला-लाल मिश्रित (कांस्य जैसा रंग)
• हल्का पीला या तांबे जैसा रंग
अक्सर इनके शरीर पर सफेद धब्बे भी पाए जाते हैं।
8. थन
गिर गाय का थन बड़ा, विकसित और नस्ल मानकों के अनुसार सही आकार का होता है। चूंकि यह दूध देने वाली प्रमुख नस्लों में एक है, इसलिए थन की नसें स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं।
9. पूंछ
इनकी पूंछ लंबी और मजबूत होती है। पूंछ के सिरे पर काले रंग का घना झबरा बाल होता है, जिसे “टफ्ट” कहते हैं।
10. त्वचा
गिर गाय की त्वचा ढीली, चिकनी और मुलायम होती है। यह गर्मी में शरीर का तापमान नियंत्रित करने में मदद करती है। त्वचा का रंग हल्का लाल, भूरे या काले मिश्रण में देखा जा सकता है।
11. वजन
गिर गाय का औसत वजन:
• गाय (Female): 350–400 किलोग्राम
• सांड (Male): 550–650 किलोग्राम
कुछ अच्छी नस्ल के सांड 800 किलोग्राम तक भी हो सकते हैं।
12. गिर गाय की ऊँचाई
गिर गाय की औसत कद-काठी मजबूत होती है।
• ऊँचाई (कंधे तक): 120–135 सेंटीमीटर
• सांड आमतौर पर इससे 10–15 सेमी तक अधिक ऊँचे होते हैं।
गिर गाय अपनी सुंदर शारीरिक बनावट, लंबी कानों, चमकदार आंखों, बड़ा माथा, मजबूत कूबड़ और अधिक दूध उत्पादन क्षमता के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। यदि आप गिर गाय की शुद्धता पहचानना चाहते हैं, तो उपर्युक्त सभी बिंदु उसके स्पष्ट संकेतक हैं।
गिर गाय की खासियतें
भारत की मशहूर गिर गाय अपनी बेहतरीन दुग्ध उत्पादन, मजबूत शरीर, और शांत स्वभाव के लिए जानी जाती है। गुजरात के गिर जंगलों से निकली यह देसी नस्ल आज पूरे देश में लोकप्रिय है। आइए जानते हैं गिर गाय की प्रमुख खूबियाँ—
1. उच्च गुणवत्ता वाला A2 दूध
गिर गाय का दूध A2 प्रकार का होता है, जो पचने में आसान और पोषक तत्वों से भरपूर माना जाता है।
2. दुग्ध उत्पादन अच्छा
इस नस्ल की गाय औसतन 10–15 लीटर तक दूध देती है, और बेहतर देखभाल में इससे भी ज्यादा उत्पादन संभव है।
3. लंबी आयु और अच्छी उत्पादकता
गिर गाय कई वर्षों तक लगातार दूध देती रहती है, जिससे किसान को लम्बे समय तक लाभ मिलता है।
4. गर्म और कठोर जलवायु में अनुकूल
यह गाय गर्मी सहन करने में सक्षम है। कम पानी में भी यह सहज रहती है।
5. रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत
गिर नस्ल स्वाभाविक रूप से कई रोगों से लड़ने की क्षमता रखती है, जिससे पशु-चिकित्सा खर्च कम आता है।
6. शरीर का ढाँचा मजबूत
इसकी हड्डियाँ और मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं—जिस वजह से यह कठिन परिस्थितियों में भी स्वस्थ रहती है।
7. स्वभाव से शांत और मिलनसार
गिर गाय इंसानों के साथ जल्दी घुलमिल जाती है और स्वभाव से बेहद शांत होती है।
8. गर्मी में पसीने के जरिए शरीर ठंडा रखने की क्षमता
इसके शरीर की त्वचा पसीना छोड़कर तापमान नियंत्रित करती है।
9. कम चारे में भी जीवित रहने की क्षमता
यह कम चारा मिलने पर भी खुद को संतुलित रख लेती है, जिससे पालन-पोषण आसान होता है।
10. देसी नस्ल होने के कारण प्रजनन क्षमता अच्छी
यह आसानी से गर्भ धारण करती है और बच्चे भी स्वस्थ होते हैं।
11. लंबी व घनी पूंछ मक्खियाँ व कीड़े दूर रखती है
इसकी पूंछ लंबे बालों वाली होती है जो कीड़ों को दूर रखने में मदद करती है।
12. लाल-भूरे रंग की आकर्षक बनावट
गिर गाय का रंग, शरीर की चमक और लंबा माथा इसे देखने में सुंदर बनाता है।
13. ऊबड़-खाबड़ इलाकों में भी आसानी से चल सकती है
इसकी टांगें मजबूत होती हैं, जिससे यह पहाड़ी या जंगल वाले क्षेत्रों में भी सहज रहती है।
14. प्राकृतिक तरीके से दूध में औषधीय गुण
इसके दूध में ओमेगा-3, कैल्शियम, और कई मिनरल अधिक होते हैं।
15. देसी घी बनाने में सर्वश्रेष्ठ
गिर गाय के दूध से बना घी स्वाद, सुगंध और गुणवत्ता में श्रेष्ठ माना जाता है।
गिर गाय के दूध के लाभ
गिर गाय का दूध अपने A2 प्रोटीन और प्राकृतिक पोषक तत्वों के लिए जाना जाता है। नियमित रूप से गिर दूध का सेवन शरीर को कई तरह से फायदा पहुँचाता है। यहाँ इसके 10 मुख्य लाभ दिए गए हैं—
1. A2 प्रोटीन से भरपूर
गिर गाय का दूध A2 बीटा-केसीन प्रोटीन वाला होता है, जो आसानी से पचता है और शरीर को प्राकृतिक ऊर्जा देता है।
2. पाचन शक्ति को बढ़ाता है
A2 दूध पेट के लिए हल्का माना जाता है, इसलिए गैस, एसिडिटी और कब्ज जैसी समस्याओं में भी सहायक होता है।
3. इम्यूनिटी को मजबूत करता है
इस दूध में मौजूद विटामिन A, D, और एंटीऑक्सीडेंट शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं।
4. दिमाग और नर्वस सिस्टम के लिए अच्छा
दूध में मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड मस्तिष्क के विकास और मानसिक एकाग्रता में मदद करते हैं।
5. हड्डियों को मजबूत बनाता है
कैल्शियम, फॉस्फोरस और मैग्नीशियम से भरपूर होने के कारण यह हड्डियों, दाँतों और जोड़ों के लिए बहुत लाभदायक है।
6. दिल के लिए फायदेमंद
A2 दूध खराब कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाए बिना शरीर को आवश्यक फैट देता है, जिससे हार्ट हेल्थ बेहतर रहती है।
7. बच्चों के विकास में मददगार
यह प्राकृतिक रूप से प्रोटीन, फैट और मिनरल से भरपूर होता है, जो बच्चों की ग्रोथ और इम्युनिटी को सपोर्ट करता है।
8. त्वचा और बालों के लिए लाभदायक
विटामिन A और प्रोटीन त्वचा को चमकदार और बालों को पोषण देते हैं।
9. घी बनाने में सर्वश्रेष्ठ
गिर गाय के दूध से बना घी हल्का, सुगंधित और औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है।
10. तनाव कम करने में सहायक
गिर दूध में मौजूद ट्रिप्टोफैन हार्मोन संतुलन में मदद करता है, जिससे नींद और मानसिक शांति बेहतर होती है।
गिर गाय पालन कैसे करें?
भारत की श्रेष्ठ दुग्ध नस्लों में से एक गिर गाय अपनी उच्च दूध उत्पादन क्षमता, गर्मी सहनशीलता और लंबे जीवनकाल के लिए प्रसिद्ध है। यदि आप गिर गाय का पालन-पोषण शुरू करना चाहते हैं, तो सही प्रबंधन, स्वच्छ रहने की जगह और बछड़ों की अच्छी देखरेख बहुत जरूरी है। इस ब्लॉग में हम विस्तार से जानेंगे कि गिर गाय पालन कैसे करें।
1. गिर गाय के लिए रहने का स्थान
1. स्वच्छ, हवादार और सूखा शेड
• शेड में प्राकृतिक रोशनी और हवा का अच्छा इंतजाम हो।
• फर्श फिसलन-रहित और हल्का ढलान वाला रखें ताकि पानी न रुके।
• शेड हमेशा सूखा रहे, इससे खुर रोग और संक्रमण कम होते हैं।
2. तापमान और वातावरण
• गिर गाय गर्मी सहन कर लेती है, लेकिन अत्यधिक गर्मी में कूलर/फॉगर्स या स्प्रिंकलर का उपयोग करें।
• बारिश के मौसम में छत से पानी न टपके, नमी नियंत्रित रखें।
3. साफ-सफाई
• रोजाना शेड की सफाई करें।
• सप्ताह में 1–2 बार फिनाइल/डिसइन्फेक्टेंट का प्रयोग करें।
• गोबर-मूत्र को निकासी नाले से बाहर निकालें।
4. आरामदायक बिछावन
• सूखा भूसा, रेत या रबर मैट का उपयोग करें।
• गर्भवती गायों के लिए नरम और चौड़ा बिछावन रखें।
5. चराई क्षेत्र
• यदि संभव हो तो चारागाह में रोज 3–4 घंटे चराई कराएं; इससे गाय स्वस्थ रहती है और दूध की गुणवत्ता बढ़ती है।
गिर गाय का आहार
1. हरा चारा
• नेपियर, ज्वार, बाजरा, मक्का आदि।
• रोजाना शरीर के वजन के 10–12% तक हरा चारा दें।
2. सूखा चारा
• भूसा, खल, चोकर आदि।
• सूखे और हरे चारे का संतुलन रखें (50–50 अनुपात अच्छा रहता है)।
3. खनिज मिश्रण और नमक
• रोजाना 30–50 ग्राम मिनरल मिक्स अवश्य दें।
• खनिज की कमी से दूध कम होता है और प्रजनन क्षमता घटती है।
4. साफ और ताजा पानी
• दिन में 3–4 बार साफ पानी उपलब्ध रहे।
• प्रसव के समय और गर्मी में पानी की मात्रा बढ़ाएँ।
3. प्रसव से पहले की देखभाल
1. गर्भावस्था के 7–8वें महीने में विशेष देखरेख
• पोषक आहार बढ़ा दें।
• गाय को अलग, शांत जगह में रखें।
• पैर और थन को साफ रखें ताकि संक्रमण न हो।
2. सूखा अवधि
• प्रसव से 60 दिन पहले दूध रोक दें।
• इस समय शरीर और थन की कोशिकाएँ पुनर्निर्माण करती हैं।
4. प्रसव के बाद गिर गाय की देखभाल
1. माँ की देखभाल
• प्रसव के तुरंत बाद थन को साफ गुनगुने पानी से साफ करें।
• पहले 3–5 दिन गाय को हल्का आहार दें (भूसा + गुड़ + पानी)।
• 7वें दिन से सामान्य आहार शुरू करें।
• गाय को कैल्शियम और मिनरल मिक्स जरूर दें ताकि दूध रुक न जाए।
5. प्रसव के बाद गिर बछड़ों की देखरेख
1. कोलोस्ट्रम (पहला दूध) पिलाना — जीवनभर की सुरक्षा
• बछड़े को जन्म के 1 घंटे के अंदर कोलोस्ट्रम पिलाएं।
• पहले 3 दिनों तक यह दूध अनिवार्य है, इससे
रोग-प्रतिकारक क्षमता बढ़ती है
पेट ठीक रहता है
वृद्धि तेजी से होती है
2. नाल कटाई और सफाई
• नाल को 1–2 इंच छोड़कर काटें और टिंचर आयोडीन से साफ करें।
• इससे संक्रमण नहीं होता।
3. बिछावन और गर्माहट
• बछड़े के लिए सूखी और गर्म जगह रखें।
• ठंड में जूट की बोरी या सूखा घास बिछाएँ।
4. दूध पिलाने का तरीका
• 1–15 दिन: शरीर के वजन के 10% के बराबर दूध
• 15–60 दिन: दिन में 2–3 बार दूध
• 3 महीने बाद: धीरे-धीरे ठोस चारा शुरू करें
5. बछड़े का टीकाकरण और deworming
• जन्म के 3–4 महीने बाद टीकाकरण शुरू करें।
• हर 3 महीने में कृमिनाशक दवा दें।
6. गिर गाय में स्वास्थ्य प्रबंधन
रूटीन टीकाकरण
• FMD
• HS
• BQ
• Brucellosis
• Deworming हर 3 महीने में
संक्रमण से बचाव
• नई गाय को 10–15 दिन “क्वारंटाइन” में रखें।
• थन की सफाई (प्री-मिल्क और पोस्ट-मिल्क) करना न भूलें।
7. दूध दुहने की सही विधि
• प्रतिदिन एक ही समय पर दुहें।
• थन को साफ पानी से धोकर सूखा लें।
• धीरे और समान दबाव से दुहें।
• स्टेनलेस स्टील की बाल्टी का उपयोग करें।
गिर गाय को क्या खिलाना चाहिए?
भारत की सबसे लोकप्रिय दुग्ध देने वाली नस्लों में गिर गाय अग्रणी है। इसकी दूध उत्पादन क्षमता, रोग प्रतिरोधक क्षमता और लंबे समय तक उत्पादन करने की क्षमता इसे किसानों की पहली पसंद बनाती है। लेकिन इन गुणों का पूरा लाभ तभी मिलता है जब गाय को सही और संतुलित आहार दिया जाए।
1. गिर गाय के आहार के मुख्य घटक
गिर गाय के भोजन को 4 मुख्य हिस्सों में बांटा जाता है:
1.1 हरा चारा
हरा चारा पाचन सुधारता है और दूध उत्पादन बढ़ाता है।
अच्छे विकल्प:
• ज्वार
• बाजरा
• नेपीयर घास
• बरसीम (सर्दियों में)
• लुज़रन (Alfalfa)
प्रतिदिन आवश्यकता:
25–30 किलो हरा चारा प्रति वयस्क गाय
1.2 सूखा चारा (Dry Fodder)
सूखे चारे से रेशे मिलते हैं जो रूमेन स्वास्थ्य के लिए जरूरी हैं।
उत्तम विकल्प:
• गेहूं का भूसा (Wheat Straw)
• चना या अरहर का भूसा
• सूखी लुज़रन
प्रतिदिन आवश्यकता:
5–7 किलो सूखा चारा
1.3 दाना मिश्रण (Concentrate Mix)
दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।
दाना मिश्रण में ऊर्जा, प्रोटीन और मिनरल शामिल होते हैं।
गिर गाय के लिए परफेक्ट “दाना मिश्रण” रेसिपी
(20 लीटर तक दूध देने वाली गाय के लिए)
सामग्री मात्रा (किलो में)
मक्का/मक्का चूरी 30
गेहूं/जौ 20
मूंगफली/सरसों/सोयाबीन खली 25
चोकर (Wheat Bran) 20
मिनरल मिक्सचर 2
नमक 1
खुराक नियम:
प्रति 1 लीटर दूध = 400–500 ग्राम दाना मिश्रण
सूखे चारे के साथ दाना हमेशा मिलाकर दें
1.4 मिनरल मिक्सचर व नमक
गिर गायों में कैल्शियम, फॉस्फोरस और नमक की कमी जल्दी हो सकती है।
इसलिए:
• प्रतिदिन 50–60 ग्राम मिनरल मिक्सचर
• 30 ग्राम सामान्य नमक
गर्भित गायों में यह और भी जरूरी हो जाता है।
2. गिर गाय के लिए आवश्यक पोषक तत्व
2.1 ऊर्जा (Energy)
– मक्का, जौ, गेहूं
ऊर्जा की कमी से दूध कम होता है।
2.2 प्रोटीन (Protein)
– खली (मूंगफली, सोया, सरसों)
प्रोटीन से दूध की मात्रा और गुणवत्ता बढ़ती है।
2.3 कैल्शियम व फॉस्फोरस
– मिनरल मिक्स
अस्थियों और दूध उत्पादन के लिए जरूरी।
2.4 विटामिन A, D, E
– हरा चारा
विशेषकर प्रसव के बाद आवश्यक।
2.5 फाइबर (Fiber)
– सूखा चारा
रूमेन का pH बनाए रखता है।
3. गिर गाय के लिए आहार समय-सारणी (Feeding Schedule)
सुबह
• 3–4 किलो दाना
• 10–12 किलो हरा चारा
• 2–3 किलो सूखा चारा
• स्वच्छ पानी
दोपहर
• 10–12 किलो हरा चारा
• मिनरल मिक्सचर + नमक
शाम
• 3–4 किलो दाना
• 3–4 किलो सूखा चारा
• कुनकुना पानी
4. गिर गाय को खिलाते समय ध्यान देने योग्य बातें
• चारा हमेशा ताज़ा और फफूंद-रहित हो
• अचानक आहार परिवर्तन न करें
• प्रसव के बाद गाय को हल्का और ऊर्जा-युक्त आहार दें
• पानी हमेशा साफ और भरपूर हो (50–60 लीटर/दिन)
• गर्मियों में इलेक्ट्रोलाइट जरूर दें
गाभिन गिर गाय का कैसे रखें ध्यान?
गिर गाय अपनी ऊँची दूध उत्पादन क्षमता, सहनशक्ति और रोग-प्रतिरोध के लिए प्रसिद्ध है। लेकिन गर्भावस्था के दौरान (गाभिन अवस्था) इसकी सही देखभाल करना बेहद ज़रूरी होता है। इस समय की थोड़ी-सी लापरवाही दूध उत्पादन, बछड़े के स्वास्थ्य और गाय की सुरक्षा—तीनों पर असर डाल सकती है।
1. गाभिन गिर गाय को पहचानें
गर्भधारण के 45–60 दिन बाद गाय में ये बदलाव दिखते हैं:
• दूध उत्पादन कम हो जाना
• तेज भूख लगना
• पेट का निचला हिस्सा हल्का उभरा हुआ
• शांत व्यवहार
• मासिक गर्मी (हीट) बंद होना
यदि शंका हो, तो 60 दिन के बाद पशु चिकित्सक से प्रेगनेंसी टेस्ट अवश्य कराएं।
2. रहने का स्थान (हाउसिंग मैनेजमेंट)
स्वच्छ, सूखा और हवादार शेड
फिसलन रहित फर्श
रात में गर्म बिछावन (कड़कड़िहट/ठंड में सूखी भूसी या रबर मैट)
10–12 घंटे खुली जगह में घूमने का मौका
मच्छर-मक्खियों से सुरक्षा
प्रसव से पहले गाय को भीड़-भाड़ से दूर रखें
3. आहार (Diet) – क्या खिलाएं?
गर्भावस्था में गिर गाय को बच्चे के विकास, शरीर की मजबूती और सुरक्षित प्रसव के लिए संतुलित आहार चाहिए।
(A) हरा चारा
• नेपियर, मक्का, ज्वार, बरसीम, लोबिया, बाजरा
• मात्रा: 25–30 किलो प्रतिदिन
(B) सूखा चारा
• अच्छे गुणवत्ता का सूखा भूसा/पराली
• मात्रा: 4–6 किलो प्रतिदिन
(C) दाना मिश्रण (कंसंट्रेट)
गर्भावस्था के 5वें महीने से बढ़ाना शुरू करें
• 1–1.5 किलो (पहले 3 महीने)
• 2–2.5 किलो (4–6 महीने)
• 2.5–3.5 किलो (अंतिम महीने)
आदर्श दाना मिश्रण:
• मक्का/जौ – 30%
• सरसों/सोयाबीन खल – 30%
• चोकर – 30%
• खनिज मिश्रण + नमक – 10%
(D) खनिज मिश्रण (Mineral Mixture) और कैल्शियम
• 50–60 ग्राम प्रतिदिन
• प्रसव से 15–20 दिन पहले कैल्शियम देना धीरे-धीरे घटाएं ताकि दूध बुखार न हो।
(E) साफ पानी
हर समय ताज़ा और स्वच्छ पानी उपलब्ध होना चाहिए।
4. स्वास्थ्य देखभाल (Health Management)
टिक/मक्खी नियंत्रण:
हर 15 दिन पर स्प्रे या पाउडर।
गर्भावस्था के दौरान टीकाकरण:
• FMD
• HS
• BQ
(Timing पशु चिकित्सक से पूछकर करें)
कीड़ा नाशक (Deworming):
3–4 महीने में एक बार, लेकिन अंतिम महीने में न दें।
5. प्रसव से पहले (Last Month Care)
• गाय को अलग “प्रसव कक्ष” में रखें
• हल्के, आसानी से पचने वाले चारे दें
• भारी दाना कम कर दें
• रोज़ 1–2 घंटे टहलाएं
• थनों की सफाई करें
• अचानक कोई बदलाव न करें (चारा/स्थान)
लगभग प्रसव के संकेत:
• थनों में दूध का भरना
• योनि से साफ चिपचिपा पदार्थ निकलना
• बार-बार बैठना-उठना
• पूंछ ढीली हो जाना
• भूख कम होना
6. प्रसव के समय क्या करें?
गाय को शांत वातावरण दें
ज़रूरत पड़ने पर ही हस्तक्षेप करें
2–3 घंटे से अधिक समय लगे तो पशु चिकित्सक को बुलाएं
साफ-सूथरा बिछावन रखें
प्रसव के बाद 2–3 घंटे तक गाय की निगरानी करें
7. प्रसव के बाद की देखभाल (Post-Calving Care)
• गाय को गुनगुना पानी + गुड़ दें
• थन की सफाई करें और पहला दूध (कोलोस्ट्रम) बछड़े को 1 घंटे में जरूर पिलाएं
• 1–2 दिन तक हल्का दाना दें
• कैल्शियम की खुराक शुरू करें
• बछड़े की नाल को आयोडीन से साफ करें
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