Buffalo Pregnancy Guide: Complete Information and Care Tips from Conception to Calving
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Buffalo Pregnancy Guide
Buffalo Pregnancy :डेयरी फार्मिंग में सबसे बड़ा मुनाफा अच्छे दूध से नहीं बल्कि समय पर बच्चा देने वाली भैंस से आता है। अगर भैंस समय पर गाभिन (pregnant) नहीं होती या देर से बच्चा देती है, तो दूध का अंतराल बढ़ जाता है और पशुपालक को भारी नुकसान होता है।
भारतीय डेयरी फार्मिंग में भैंस को ‘ब्लैक गोल्ड’ यानी काला सोना कहा जाता है। मुर्रा, जाफराबादी और नीली रावी जैसी नस्लें अपनी उच्च दूध उत्पादन क्षमता के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं। लेकिन एक सफल डेयरी किसान बनने के लिए केवल अच्छी नस्ल लाना काफी नहीं है, बल्कि भैंस के गर्भावस्था चक्र (Pregnancy Cycle) को समझना और उसकी सही देखभाल करना सबसे महत्वपूर्ण है।
भैंस की गर्भावस्था का समय न केवल एक नए बछड़े (कटड़े/कटड़ी) के जन्म का आधार है, बल्कि यह भैंस के अगले ब्यात (Lactation) में मिलने वाले दूध की मात्रा को भी निर्धारित करता है। आइए जानते हैं भैंस के गर्भावस्था चक्र से जुड़ी हर छोटी-बड़ी बात।
भैंस की गर्भावस्था अवधि (Gestation Period)
सबसे पहला और बुनियादी सवाल, भैंस कितने दिनों तक गर्भवती रहती है? गाय की तुलना में भैंस की गर्भावस्था अवधि थोड़ी लंबी होती है। औसतन, एक भैंस 305 से 315 दिन (लगभग 10 महीने और 10 दिन) तक गर्भवती रहती है। हालांकि, यह अवधि नस्ल, खान-पान और मौसम के आधार पर 5-10 दिन कम या ज्यादा हो सकती है।
गर्भावस्था के मुख्य चरण और पहचान
भैंस के गर्भधारण को तीन मुख्य भागों में समझा जा सकता है:
- शुरुआती चरण (0-3 महीने): गर्भाधान (AI या सांड द्वारा) के 21 दिन बाद यदि भैंस दोबारा ‘गर्मी’ (Heat) में नहीं आती, तो यह गर्भधारण का पहला संकेत है। 60 दिनों के बाद किसी अनुभवी पशु चिकित्सक से ‘पीड़ी’ (Pregnancy Diagnosis) जरूर करवाएं।
- मध्य चरण (4-7 महीने): इस दौरान भ्रूण का विकास तेजी से होता है। भैंस शांत होने लगती है और उसका पेट धीरे-धीरे दाईं ओर से बाहर की तरफ दिखने लगता है।
अंतिम चरण (8-10 महीने): यह सबसे संवेदनशील समय है। इस दौरान भैंस के थन विकसित होने लगते हैं और शरीर में प्रसव की तैयारी शुरू हो जाती है।
गर्भावस्था के दौरान सही पोषण
भारतीय परिस्थितियों में, विशेषकर अंतिम 3 महीनों में भैंस को अतिरिक्त पोषण की आवश्यकता होती है:
- संतुलित दाना: सामान्य आहार के अलावा 1.5 से 2 किलो अतिरिक्त ‘प्रेगनेंसी राशन’ देना चाहिए ताकि भ्रूण का वजन सही रहे।
- खनिज मिश्रण: प्रतिदिन 50-60 ग्राम अच्छी गुणवत्ता वाला मिनरल मिक्सचर दें। यह प्रसव के समय ‘जेर’ (Placenta) गिरने में मदद करता है।
- हरा चारा: शरीर में विटामिन-A की पूर्ति के लिए पर्याप्त मात्रा में हरा चारा दें।
'ड्राई पीरियड' का महत्व
प्रसव से कम से कम 60 दिन पहले भैंस का दूध निकालना बंद कर देना चाहिए। इसे ‘पशु को सुखाना’ कहते हैं। यह समय भैंस के शरीर को रिकवर करने और अगले ब्यात के लिए भरपूर ‘खिस’ (Colostrum) और दूध तैयार करने के लिए बहुत जरूरी है।
प्रसव के निकट आने के लक्षण
जब प्रसव में 24 से 48 घंटे बचे हों, तो भैंस ये संकेत देती है:
- भैंस का बार-बार उठना और बैठना।
- पूंछ के पास के हिस्से (Pin bones) का ढीला पड़ जाना।
- थनों का पूरी तरह भर जाना और उनमें से गाढ़ा दूध टपकना।
- भैंस का झुंड से अलग होकर अकेले बैठना और सुस्त होना।
भैंस के प्रजनन चक्र में जरूरी सावधानियां:
- गर्भवती भैंस को कभी भी फिसलने वाली जगह पर न बांधें।
- उसे अधिक दूरी तक पैदल चलाने या डराने से बचें।
- अंतिम महीनों में भारी एंटीबायोटिक्स या बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं न दें।
भैंस का गर्भावस्था चक्र धैर्य और वैज्ञानिक देखभाल की मांग करता है। आपकी थोड़ी सी एहतियात न केवल एक स्वस्थ कटड़े को जन्म देगी, बल्कि आपके डेयरी व्यवसाय को भी मुनाफे की ऊंचाइयों पर ले जाएगी।
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